क्या इस बार किसानों को मिलेगा बड़ा तोहफा? एमएसपी गारंटी और पीएम किसान पर टिकी करोड़ों निगाहें | Budget 2026 for Farmers

Budget 2026 for Farmers – भारत के खेतों में पसीना बहाने वाला किसान अक्सर आसमान की ओर देखता है—कभी बारिश की उम्मीद में, तो कभी सरकार की राह देखते हुए। 1 फरवरी, 2026 को जब वित्त मंत्री संसद में बजट का लाल बही-खाता खोलेंगे, तो देश के करोड़ों किसानों के मन में एक ही सवाल होगा: “क्या इस बार हमारी झोली में कुछ ठोस आएगा, या फिर वही पुराने वादों का शोर सुनाई देगा?”

भारतीय अर्थव्यवस्था, जो 5 ट्रिलियन डॉलर बनने की ओर अग्रसर है, उसकी बुनियाद आज भी कृषि ही है। लेकिन यह बुनियाद हिल रही है। बढ़ती लागत, अनिश्चित मौसम और उपज का सही दाम न मिलना—इस त्रिकोण में फंसा किसान कर्ज के दलदल में धंसता जा रहा है। बजट 2026 से उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं। यह लेख उन सभी पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करेगा कि आखिर किसान आंदोलन, ग्रामीण भारत की सुस्त मांग और खाद्य सुरक्षा के बीच सरकार इस बजट में क्या बड़े ऐलान कर सकती है।

आइये, विस्तार से समझते हैं कि एमएसपी (MSP), पीएम किसान सम्मान निधि और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बजट 2026 में क्या संभावनाएं बन रही हैं।

भारतीय कृषि की वर्तमान स्थिति: संकट और चुनौतियां Budget 2026 for Farmers

बजट अनुमानों को समझने से पहले, हमें धरातल की सच्चाई जाननी होगी। आंकड़े बताते हैं कि देश की लगभग 45-50% आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है, लेकिन जीडीपी में इसका योगदान घटकर 15-18% के बीच रह गया है। यह असंतुलन ही सारी समस्याओं की जड़ है।

लागत और मुनाफे का बिगड़ता गणित

एक आम किसान के लिए खेती अब ‘घाटे का सौदा’ बनती जा रही है।

  • डीजल और खाद: पिछले पांच वर्षों में डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है। डीएपी (DAP) और यूरिया की बोरियों के दाम भले ही सब्सिडी के कारण नियंत्रित हों, लेकिन उनकी उपलब्धता (Black Marketing) ने लागत बढ़ा दी है।
  • मजदूरी: मनरेगा और शहरी पलायन के कारण गांवों में खेती के लिए मजदूर नहीं मिल रहे, जिससे श्रम लागत बढ़ गई है।

जलवायु परिवर्तन की मार

साल 2025 में हमने देखा कि कैसे बेमौसम बारिश और हीटवेव ने गेहूं और सब्जियों की फसल को बर्बाद किया। भारतीय कृषि आज भी ‘मानसून का जुआ’ है। ऐसे में बजट 2026 से उम्मीद है कि वह केवल राहत पैकेज नहीं, बल्कि स्थायी समाधान लेकर आए।

एमएसपी (MSP): कानूनी गारंटी या दायरा विस्तार?

किसानों की सबसे बड़ी और पुरानी मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की रही है। बजट 2026 में इस मुद्दे पर सरकार का रुख सबसे अहम होगा।

क्या है किसानों की मांग?

किसान संगठन चाहते हैं कि एमएसपी को केवल एक सरकारी नीति न रखकर, एक कानूनी अधिकार बना दिया जाए। इसका मतलब है कि मंडी हो या बाहर, कोई भी व्यापारी एमएसपी से नीचे फसल न खरीद सके। साथ ही, मांग यह भी है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार C2+50% फार्मूले (लागत का डेढ़ गुना) पर दाम तय हों।

बजट 2026 में क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार सीधे कानूनी गारंटी देने से बच सकती है, लेकिन बजट में बीच का रास्ता निकाला जा सकता है:

  1. फसलों का दायरा बढ़ना: अभी एमएसपी मुख्य रूप से गेहूं और धान पर प्रभावी है। बजट में तिलहन (Oilseeds) और दलहन (Pulses) की खरीद के लिए एक बड़ा फण्ड आवंटित किया जा सकता है ताकि हम आयात पर निर्भर न रहें।
  2. सब्जियों के लिए भावांतर योजना: आलू, प्याज और टमाटर (TOP crops) के लिए सरकार ‘भावांतर भरपाई योजना’ का राष्ट्रीय संस्करण ला सकती है। यानी अगर बाजार भाव एमएसपी से कम है, तो अंतर की राशि सरकार सीधे किसान के खाते में भेजेगी।
  3. खरीद तंत्र की मजबूती: एमएसपी की घोषणा करना आसान है, लेकिन खरीद केंद्र बनाना मुश्किल। बजट में मंडियों के आधुनिकीकरण और नए खरीद केंद्रों के लिए विशेष पैकेज की उम्मीद है।

पीएम किसान सम्मान निधि: क्या 6,000 रुपये काफी हैं?

साल 2019 में शुरू हुई पीएम किसान सम्मान निधि ने छोटे किसानों को बहुत सहारा दिया है। सालाना 6,000 रुपये की राशि बीज और खाद खरीदने में मदद करती है। लेकिन पिछले 7 सालों में महंगाई जिस रफ़्तार से बढ़ी है, यह राशि अब ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हो रही है।

राशि में बढ़ोतरी की प्रबल संभावना

बजट 2026 में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि सरकार इस राशि को बढ़ा सकती है।

  • प्रस्ताव: इसे बढ़ाकर 9,000 से 12,000 रुपये सालाना किया जा सकता है।
  • तर्क: कई राज्यों में (जैसे तेलंगाना की रायथु बंधु या ओडिशा की कालिया योजना) राज्य सरकारें केंद्र से ज्यादा मदद दे रही हैं। चुनावी राज्यों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग (Rural Demand) बढ़ाने के लिए सरकार को नकद हस्तांतरण बढ़ाना ही होगा।

महिला किसानों के लिए विशेष प्रावधान

एक नई संभावना यह भी जताई जा रही है कि सरकार ‘महिला किसान सम्मान निधि’ के तहत महिला भू-स्वामियों के लिए राशि को 12,000 रुपये तक कर सकती है। यह महिला सशक्तिकरण और कृषि दोनों के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ होगा।

कृषि ऋण और केसीसी (KCC): कर्ज माफ़ी नहीं, आसान किश्तें चाहिए

हर साल बजट में कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाया जाता है। पिछले साल यह 20 लाख करोड़ के पार था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि छोटा किसान आज भी साहूकार के चंगुल में है क्योंकि बैंकों की कागजी कार्रवाई जटिल है।

बजट से उम्मीदें:

  • ब्याज मुक्त ऋण: अभी समय पर पैसा चुकाने पर 4% ब्याज लगता है। मांग है कि 1 लाख रुपये तक के छोटे कर्जों को 0% ब्याज पर दिया जाए।
  • केसीसी (KCC) का विस्तार: किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाई जाए और इसे पशुपालन व मछली पालन से जुड़े किसानों तक आसान शर्तों पर पहुँचाया जाए।
  • क्रेडिट गारंटी फण्ड: छोटे और सीमांत किसानों के लिए सरकार एक गारंटी फण्ड बना सकती है ताकि बैंक उन्हें बिना डर के लोन दे सकें।

एग्री-टेक और ड्रोन दीदी: भविष्य की खेती

प्रधानमंत्री का जोर लगातार तकनीक पर रहा है। बजट 2026 में ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ के लिए बड़े आवंटन देखने को मिल सकते हैं।

ड्रोन और एआई (AI) का उपयोग

  • कीटनाशक छिड़काव: ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना का विस्तार किया जा सकता है। हर ग्राम पंचायत में ड्रोन उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): फसलों के नुकसान का आकलन, मिट्टी की जांच और मौसम की जानकारी के लिए एआई आधारित एप्स और सैटेलाइट तकनीक पर खर्च बढ़ाया जाएगा। इससे फसल बीमा (Fasal Bima) के क्लेम में होने वाली देरी खत्म होगी।

खाद्य प्रसंस्करण और भंडारण: खेत से बाजार तक

भारत में हर साल हजारों टन फल और सब्जियां सड़ जाती हैं क्योंकि हमारे पास कोल्ड स्टोरेज नहीं हैं। अगर किसान को अपनी उपज सही समय पर बेचने की ताकत चाहिए, तो उसे भंडारण की सुविधा चाहिए।

ऑपरेशन ग्रीन्स का विस्तार

बजट 2026 में ‘ऑपरेशन ग्रीन्स’ का दायरा बढ़ाकर उसमें सभी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों को शामिल किया जा सकता है।

  • गोदाम निर्माण: ‘सहकार से समृद्धि’ मंत्र के तहत पैक्स (PACS) स्तर पर छोटे गोदाम बनाने के लिए भारी भरकम बजट दिया जा सकता है।
  • फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर्स: ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के लिए (जैसे टमाटर से केचप या आलू से चिप्स बनाने की यूनिट) PLI स्कीम जैसी रियायतें दी जा सकती हैं। इससे गांव में रोजगार भी पैदा होगा।

उर्वरक सब्सिडी और वैकल्पिक खेती

रूस-यूक्रेन युद्ध और खाड़ी देशों के तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्टिलाइजर के दाम आसमान पर हैं। सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ रहा है।

  • नैनो यूरिया (Nano Urea): सरकार का पूरा जोर नैनो यूरिया और डीएपी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर होगा ताकि आयात कम किया जा सके। इसके लिए बजट में जागरूकता अभियान और सब्सिडी का प्रावधान हो सकता है।
  • प्राकृतिक खेती (Natural Farming): गंगा किनारे और अन्य क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि की घोषणा संभव है। यह न केवल लागत कम करेगा बल्कि जमीन की सेहत भी सुधारेगा।

सिंचाई और ऊर्जा: पीएम कुसुम योजना

डीजल मुक्त खेती का सपना पूरा करने के लिए पीएम कुसुम (PM-KUSUM) योजना बहुत महत्वपूर्ण है।

  • सोलर पंप: बजट 2026 में सोलर पंपों पर सब्सिडी 60% से बढ़ाकर 80% करने की मांग है।
  • ग्रिड से जुड़ाव: किसान अपने खेत में बिजली बनाकर सरकार को बेच सके, इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश की उम्मीद है। यह किसान के लिए ‘अतिरिक्त आय’ का एक बड़ा स्रोत बन सकता है।

निष्कर्ष :

बजट 2026 केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, यह भारत के ग्रामीण भविष्य का रोडमैप है। यदि सरकार एमएसपी की तार्किक व्यवस्था, पीएम किसान निधि में बढ़ोतरी और सिंचाई व भंडारण की ठोस व्यवस्था कर पाती है, तो यह बजट किसानों के लिए ‘अमृत काल’ का असली बजट होगा।

किसानों को “मुफ्त की रेवड़ी” नहीं चाहिए, उन्हें अपनी मेहनत का वाजीब दाम और सम्मानजनक जीवन चाहिए। अब देखना दिलचस्प होगा कि वित्त मंत्री के पिटारे से 1 फरवरी को क्या निकलता है।

(नोट: यह लेख एक विश्लेषण और उम्मीदों पर आधारित है। अंतिम जानकारी बजट भाषण के बाद ही स्पष्ट होगी।)
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