epfo new rule निजी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) हमेशा से एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवच रहा है। रिटायरमेंट के बाद स्थिर आय सुनिश्चित करने वाली पेंशन योजना अब और भी आकर्षक हो गई है। हाल के अपडेट्स के अनुसार, EPFO ने उच्च वेतन वाले कर्मचारियों को वास्तविक सैलरी के आधार पर ज्यादा पेंशन लेने का मौका दिया है। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया है, जिससे हजारों पेंशनधारकों को फायदा पहुंच रहा है। अगर आप भी EPFO सदस्य हैं, तो यह लेख आपके लिए जरूरी है – यहां हम आपको ईपीएफओ पेंशन न्यू रूल्स, पात्रता, गणना और नए बदलावों की पूरी जानकारी दे रहे हैं।
ईपीएफओ पेंशन की पात्रता क्या है? epfo new rule
EPFO के तहत पेंशन प्राप्त करने के लिए कुछ बेसिक शर्तें पूरी करनी होती हैं:
- कर्मचारी को कम से कम 10 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करनी चाहिए।
- सामान्य रूप से पेंशन 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर शुरू होती है।
- अगर कोई कर्मचारी 50 वर्ष की आयु के बाद नौकरी छोड़ देता है, तो वह रिड्यूस्ड पेंशन का विकल्प चुन सकता है। इस स्थिति में पेंशन पहले शुरू हो जाती है, लेकिन राशि में थोड़ी कटौती होती है।
- यदि सेवा अवधि 10 वर्ष से कम है, तो पेंशन का लाभ नहीं मिलता। ऐसे में केवल EPF बैलेंस ही निकाला जा सकता है।
ये नियम Employees’ Pension Scheme (EPS) 1995 के तहत बनाए गए हैं, जिनका मकसद निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों जैसी पेंशन सुविधा देना है।
पेंशन की राशि कैसे तय की जाती है?
EPFO पेंशन की गणना एक सरल लेकिन प्रभावी फॉर्मूला से होती है:
मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × सेवा के वर्ष) ÷ 70
उदाहरण से समझें:
- मान लीजिए किसी कर्मचारी की औसत पेंशन योग्य सैलरी ₹20,000 है और उसने 20 वर्ष सेवा की है।
- गणना: (20,000 × 20) ÷ 70 = लगभग ₹5,714 प्रति माह
पहले EPS-95 के तहत अधिकतम पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 ही माना जाता था, इसलिए ऊंची सैलरी वालों को पूरा फायदा नहीं मिल पाता था। लेकिन अब हायर पेंशन ऑप्शन के तहत कर्मचारी अपनी वास्तविक सैलरी पर आधारित ज्यादा पेंशन का दावा कर सकते हैं।
ईपीएफओ के नए नियमों में क्या बदलाव आए हैं?
सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले के बाद EPFO ने कई राहत भरे कदम उठाए हैं:
- उच्च वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को अब वास्तविक सैलरी पर पेंशन लेने की अनुमति है (पहले ₹15,000 की सीमा थी)।
- इसके लिए जॉइंट ऑप्शन भरना जरूरी है। जिन कर्मचारियों ने समय पर आवेदन किया, उन्हें अतिरिक्त योगदान जमा करने के बाद ज्यादा पेंशन मिल रही है।
- ऑनलाइन क्लेम प्रक्रिया को और सरल बनाया गया है, ताकि पेंशन से जुड़े सभी आवेदन घर बैठे पूरे किए जा सकें।
- पुराने सदस्य जो पहले उच्च पेंशन के लिए पात्र नहीं थे, वे भी अब आवेदन करके लाभ ले सकते हैं।
ये बदलाव खासकर उन कर्मचारियों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं, जिनकी सैलरी ₹15,000 से ज्यादा थी और जो लंबे समय से सेवा में हैं।
अंतिम बात
EPFO के नए नियम निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद मजबूत आर्थिक सहारा दे रहे हैं। अगर आप भी उच्च पेंशन का लाभ उठाना चाहते हैं, तो जल्द से जल्द EPFO पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन चेक करें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स सबमिट करें। समय पर कार्रवाई करने से आपकी मासिक पेंशन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है।




